March 09, 2026 | Astrology

2026 में विवाह? इन अशुभ तिथियों पर भूलकर भी न करें शादी!

2026 में विवाह? इन अशुभ तिथियों पर भूलकर भी न करें शादी!...

2026 में विवाह? इन अशुभ तिथियों पर भूलकर भी न करें शादी!

प्रिय मित्रों, अभिषेकसोनी.इन पर आपका हार्दिक स्वागत है। विवाह, जीवन का एक ऐसा पवित्र बंधन है जो दो आत्माओं को, दो परिवारों को एक सूत्र में पिरोता है। यह सिर्फ एक सामाजिक समारोह नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है। हमारे वैदिक ज्योतिष में विवाह को 'संस्कार' कहा गया है और हर संस्कार को सही समय पर, सही मुहूर्त में संपन्न करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। एक शुभ मुहूर्त में किया गया विवाह जीवन भर सुख-शांति और समृद्धि लाता है, जबकि एक अशुभ समय में उठाया गया कदम अनजाने में कई समस्याओं का कारण बन सकता है।

आज हम बात करेंगे साल 2026 में विवाह की। यदि आप या आपके परिवार में कोई 2026 में शादी की योजना बना रहा है, तो यह लेख आपके लिए मार्गदर्शक का काम करेगा। मैं आपको उन अशुभ तिथियों और अवधियों के बारे में विस्तार से बताऊंगा, जिन पर भूलकर भी विवाह जैसे महत्वपूर्ण कार्य की योजना नहीं बनानी चाहिए। मेरा अनुभव कहता है कि थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी आपके दाम्पत्य जीवन को कई परेशानियों से बचा सकती है।

विवाह मुहूर्त का महत्व: क्यों है सही समय इतना जरूरी?

ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर विवाह के लिए एक विशेष समय, जिसे विवाह मुहूर्त कहते हैं, निर्धारित किया जाता है। यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि हजारों वर्षों के गहन अध्ययन और अनुभव का परिणाम है। हमारे ऋषि-मुनियों ने ग्रह-नक्षत्रों की चाल, उनके प्रभावों और मनुष्य के जीवन पर उनके परिणामों का सूक्ष्म विश्लेषण किया है।

  • ग्रहीय ऊर्जा का संतुलन: विवाह के समय ग्रहों की स्थिति पति-पत्नी के भावी जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। कुछ ग्रह स्थितियाँ अत्यंत शुभ होती हैं, जो संबंधों में मधुरता, संतान सुख और आर्थिक समृद्धि लाती हैं। वहीं, कुछ स्थितियाँ कलह, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ या अन्य बाधाएँ उत्पन्न कर सकती हैं।
  • नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: अशुभ तिथियों पर कुछ विशेष प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाएँ प्रबल होती हैं। इन अवधियों में किए गए कार्यों में अक्सर बाधाएँ आती हैं या उनके परिणाम संतोषजनक नहीं होते।
  • दीर्घायु और समृद्धि: शुभ मुहूर्त में विवाह करने से दंपति को लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य, आपसी प्रेम और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। यह उनके बच्चों के भविष्य के लिए भी सकारात्मक आधार तैयार करता है।
  • वैदिक परंपरा का सम्मान: विवाह हमारे संस्कारों का एक अभिन्न अंग है और सही मुहूर्त का पालन करना हमारी प्राचीन वैदिक परंपराओं के प्रति सम्मान भी दर्शाता है।

इसलिए, 2026 में विवाह की योजना बनाते समय, इन अशुभ तिथियों से बचना और एक योग्य ज्योतिषी से परामर्श कर शुभ मुहूर्त का चयन करना अत्यंत विवेकपूर्ण निर्णय होगा।

2026 में विवाह: इन प्रमुख अशुभ अवधियों पर दें विशेष ध्यान

ज्योतिष में कई ऐसे योग और स्थितियाँ होती हैं, जिनमें विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं। 2026 में भी कुछ ऐसी ही अवधियाँ आएंगी। आइए विस्तार से जानते हैं उनके बारे में:

1. गुरु अस्त और शुक्र अस्त: जब विवाह के कारक ग्रह सो जाते हैं

हमारे वैदिक ज्योतिष में, गुरु (बृहस्पति) और शुक्र (शुक्राचार्य) को विवाह का मुख्य कारक ग्रह माना जाता है। गुरु मुख्य रूप से धर्म, ज्ञान, संतान और पति (महिलाओं की कुंडली में) का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि शुक्र प्रेम, विवाह, भौतिक सुख और पत्नी (पुरुषों की कुंडली में) के कारक हैं।

  • गुरु अस्त (Jupiter Combust): जब गुरु ग्रह सूर्य के बहुत करीब आ जाता है, तो वह 'अस्त' हो जाता है। ज्योतिषीय रूप से माना जाता है कि अस्त होने पर ग्रह अपनी शक्ति खो देता है। गुरु के अस्त होने की अवधि में विवाह करने से दांपत्य जीवन में गुरु के शुभ प्रभावों की कमी आ सकती है, जिससे धर्म-कर्म में अरुचि, संतान संबंधी समस्याएँ या पति के स्वास्थ्य/भाग्य में बाधाएँ आ सकती हैं।
  • शुक्र अस्त (Venus Combust): ठीक इसी तरह, जब शुक्र ग्रह अस्त होता है, तो वह भी अपनी शुभता खो देता है। शुक्र अस्त के दौरान विवाह करने से प्रेम संबंधों में कमी, भौतिक सुखों में बाधा, आपसी तालमेल की कमी या पत्नी के स्वास्थ्य/सौंदर्य में कमी जैसी समस्याएँ आ सकती हैं।

2026 में गुरु और शुक्र के अस्त होने की अवधियाँ (संभावित):

हालांकि, इन ग्रहों के अस्त होने की सटीक तिथियां वर्ष के पंचांग से ही पता चलती हैं, लेकिन अनुभव के आधार पर ये अवधियां सामान्यतः एक से डेढ़ महीने तक की होती हैं। 2026 में विवाह के लिए पंचांग देखकर इन अवधियों से बचना अत्यंत आवश्यक होगा। जैसे, यदि किसी वर्ष गुरु फरवरी-मार्च में अस्त होते हैं, तो इन महीनों में विवाह वर्जित होगा। इसी तरह, शुक्र अस्त भी वर्ष में एक बार अवश्य होता है। इन अवधियों के लिए अपने ज्योतिषी से पुष्टि अवश्य करें।

2. खरमास / मलमास: जब शुभ कार्य वर्जित होते हैं

खरमास या मलमास वह अवधि होती है जब सूर्य धनु राशि या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। ये दोनों राशियाँ गुरु ग्रह की राशियाँ हैं। जब सूर्य इन राशियों में होते हैं, तो माना जाता है कि सूर्य की तीव्र ऊर्जा गुरु की राशियों में कुछ नकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे शुभ कार्यों के लिए आवश्यक ऊर्जा का अभाव होता है।

  • धनु संक्रांति (जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है) से लेकर मकर संक्रांति तक खरमास होता है। यह लगभग मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी तक होता है।
  • मीन संक्रांति (जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है) से लेकर मेष संक्रांति तक मलमास होता है। यह लगभग मध्य मार्च से मध्य अप्रैल तक होता है।

2026 में खरमास/मलमास (संभावित तिथियाँ):

  1. पहला खरमास: लगभग 15 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक। इस अवधि में 2026 की शुरुआत में ही विवाह वर्जित होगा।
  2. मलमास: लगभग 14 मार्च 2026 से 13 अप्रैल 2026 तक। इस अवधि में भी विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

इन अवधियों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किए गए कार्य में सफलता नहीं मिलती या उसके परिणाम सुखद नहीं होते।

3. भद्रा काल: जब अशुभता का साया मंडराता है

भद्रा एक विशेष काल होता है जो पंचांग के अनुसार लगभग हर दिन आता है। यह विष्टि करण का आधा भाग होता है और इसे अत्यंत अशुभ माना जाता है। भद्रा में कोई भी शुभ कार्य करना निषेध होता है, विशेषकर विवाह। भद्रा में किए गए कार्य अक्सर अधूरे रह जाते हैं या उनमें विघ्न आते हैं।

भद्रा काल दिन के किसी भी समय आ सकता है और इसकी अवधि कुछ घंटों की होती है। 2026 में विवाह की योजना बनाते समय, किसी भी शुभ मुहूर्त का चयन करने से पहले भद्रा के समय की जांच अवश्य करवाएँ। यदि विवाह मुहूर्त भद्रा के साथ मेल खाता है, तो उस तिथि को टाल देना ही बेहतर है।

4. रिक्ता तिथियां: खाली हाथ रह जाने का डर

ज्योतिष में कुछ तिथियों को 'रिक्ता' तिथियां कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'खाली' या 'अधूरी'। ये तिथियां हैं चतुर्थी (चौथी), नवमी (नौवीं) और चतुर्दशी (चौदहवीं)। इन तिथियों को शुभ कार्यों के लिए अनुपयुक्त माना जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इन पर किए गए कार्य पूर्णता को प्राप्त नहीं होते या उनमें कोई कमी रह जाती है। 2026 में भी इन रिक्ता तिथियों पर विवाह से बचना चाहिए।

5. कुछ विशेष नक्षत्र और योग

कुछ नक्षत्र और योग भी विवाह के लिए शुभ नहीं माने जाते हैं। उदाहरण के लिए, मूल नक्षत्र के कुछ चरण, आर्द्रा, आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती और मघा नक्षत्र के कुछ विशेष भाग विवाह के लिए शुभ नहीं माने जाते। इसी तरह, कुछ 'विष्टि योग' या 'व्यतिपात योग' जैसे अशुभ योगों में भी विवाह से बचना चाहिए।

2026 में विवाह के लिए सामान्यतः टालने वाली संभावित तिथियाँ और अवधियाँ (उदाहरण स्वरूप)

यहां मैं आपको कुछ सामान्य अवधियों का एक उदाहरण दे रहा हूँ, जो 2026 में विवाह के लिए अशुभ हो सकती हैं। कृपया ध्यान दें कि ये उदाहरण हैं और आपको हमेशा किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से व्यक्तिगत पंचांग देखकर ही पुष्टि करनी चाहिए।

  • जनवरी 2026: वर्ष की शुरुआत खरमास के कारण (लगभग 14 जनवरी तक) विवाह के लिए अशुभ रहेगी। इसके बाद, यदि गुरु अस्त हो, तो जनवरी के अंत तक भी विवाह वर्जित रह सकता है।
  • मार्च 2026: मध्य मार्च से मध्य अप्रैल तक मलमास रहेगा, इसलिए मार्च के दूसरे पखवाड़े में विवाह से बचें।
  • अप्रैल 2026: मलमास का प्रभाव अप्रैल के मध्य तक रहेगा। यदि इस दौरान शुक्र अस्त भी हो जाए, तो पूरा अप्रैल विवाह के लिए अनुपयुक्त हो सकता है।
  • जुलाई-अगस्त 2026: अक्सर गुरु या शुक्र में से कोई एक इस अवधि में अस्त हो सकता है, जिससे यह अवधि भी विवाह के लिए अशुभ हो जाती है। इसके अलावा, देवशयनी एकादशी के बाद से देवोत्थानी एकादशी तक (लगभग जुलाई से नवंबर) चतुर्मास होता है, जिसमें भगवान विष्णु शयन करते हैं और विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं। यह एक बहुत लंबी अवधि होती है, जिस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • दिसंबर 2026: मध्य दिसंबर से फिर से खरमास शुरू हो जाएगा, जिससे दिसंबर का दूसरा पखवाड़ा विवाह के लिए अशुभ रहेगा।

इसके अतिरिक्त, प्रत्येक माह में आने वाली रिक्ता तिथियां (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और भद्रा काल भी विवाह के लिए टालने योग्य होंगे।

यदि अशुभ तिथि पर विवाह टालना संभव न हो तो क्या करें? (उपाय)

कभी-कभी कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण या किसी विशेष कारणवश, अशुभ अवधि में विवाह टालना असंभव हो जाता है। ऐसे में ज्योतिष में कुछ उपाय सुझाए गए हैं, जो नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक हो सकते हैं:

  1. शांति पूजा: किसी योग्य ब्राह्मण या ज्योतिषी से सलाह लेकर संबंधित ग्रह (गुरु या शुक्र) या संबंधित तिथि/नक्षत्र की शांति पूजा करवाएँ। यह पूजा विवाह से पहले या विवाह के दिन की जा सकती है।
  2. दान-पुण्य: उस दिन या उससे पहले अपनी क्षमता अनुसार दान-पुण्य करें। अन्नदान, वस्त्रदान या गरीबों को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  3. ईष्ट देव की आराधना: अपने ईष्ट देव या देवी की विशेष आराधना करें। भगवान शिव-पार्वती की पूजा या भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।
  4. लघु विवाह या प्रतीकात्मक विवाह: कुछ विशेष स्थितियों में, मुख्य विवाह से पहले एक प्रतीकात्मक या 'लघु विवाह' किया जा सकता है, जिसमें केवल कुछ रस्में ही निभाई जाती हैं, ताकि मुख्य विवाह को अशुभता से बचाया जा सके। यह अत्यंत विशेष परिस्थितियों में ही किया जाता है और इसके लिए विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य है।
  5. मंत्र जाप: विवाह के दिन और उससे पहले 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' (गुरु मंत्र) और 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' (शुक्र मंत्र) का जाप करना शुभता ला सकता है।

हालांकि, मेरा व्यक्तिगत सुझाव यही है कि जहाँ तक संभव हो, अशुभ तिथियों से बचें। इन उपायों का सहारा तभी लें जब कोई और विकल्प न हो।

मेरी अंतिम सलाह: विशेषज्ञ परामर्श है कुंजी

प्रिय पाठकगण, 2026 में विवाह की योजना बनाना एक बड़ा कदम है। यह आपके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय हो सकता है। इसलिए, किसी भी जल्दबाजी से बचें। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी सामान्य होती है। प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली और ग्रहीय स्थिति अलग होती है।

मेरा आपको यही सुझाव है कि आप किसी अनुभवी और विश्वसनीय ज्योतिषी से संपर्क करें। वे आपकी और आपके पार्टनर की जन्म कुंडली का गहन विश्लेषण करेंगे, ग्रहों की वर्तमान दशा, महादशा और अंतर्दशा का अध्ययन करेंगे और उसके आधार पर 2026 के लिए सबसे शुभ विवाह मुहूर्त का चयन करेंगे।

एक सही मुहूर्त न केवल आपके विवाह को सफल बनाता है, बल्कि आपके पूरे जीवन को खुशियों और समृद्धि से भर देता है। अभिषेकसोनी.इन पर हम हमेशा यही कामना करते हैं कि आपका दांपत्य जीवन सुखमय हो और आप सभी बाधाओं से मुक्त रहें। सही समय का चुनाव करें और एक आनंदमय वैवाहिक जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ!

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