March 18, 2026 | Astrology

आज का पंचांग: शुभ-अशुभ समय, दिशाशूल और क्या करें-क्या न करें।

आज का पंचांग: शुभ-अशुभ समय, दिशाशूल और क्या करें-क्या न करें...

आज का पंचांग: शुभ-अशुभ समय, दिशाशूल और क्या करें-क्या न करें

मेरे प्यारे दोस्तों, abhisheksoni.in पर आपका हार्दिक स्वागत है! मैं आपका ज्योतिषी मित्र, अभिषेक सोनी, आज आपके लिए एक ऐसा विषय लेकर आया हूँ जो आपके दैनिक जीवन को और भी सुखमय और सफल बनाने में आपकी मदद करेगा। हम बात करेंगे आज के पंचांग की। आप में से कई लोग हर सुबह उठकर अखबार में या ऑनलाइन पंचांग देखते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका वास्तविक अर्थ क्या है और यह आपके जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

पंचांग सिर्फ शुभ-अशुभ समय की जानकारी नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं का एक सूक्ष्म विश्लेषण है जो हमें बताता है कि किस समय कौन सा कार्य करना चाहिए और किस समय किस कार्य से बचना चाहिए। यह हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलने का मार्ग दिखाता है। आइए, आज हम इस प्राचीन ज्ञान को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि आज के पंचांग के अनुसार हमें क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।

पंचांग क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, 'पंचांग' का अर्थ है 'पांच अंग' या 'पांच भाग'। ये पांच अंग मिलकर किसी भी दिन की खगोलीय स्थिति का पूरा विवरण देते हैं। ये पांच अंग हैं:

  • तिथि (Tithi): चंद्रमा की कला (फेज) को दर्शाती है।
  • वार (Vaar): सप्ताह के दिन (सोमवार, मंगलवार आदि) को दर्शाता है।
  • नक्षत्र (Nakshatra): चंद्रमा जिस तारा समूह में होता है।
  • योग (Yoga): सूर्य और चंद्रमा के देशांतर के योग से बनता है।
  • करण (Karana): तिथि का आधा भाग होता है।

ये पांचों मिलकर हमें किसी भी विशेष दिन की ऊर्जा और प्रकृति के बारे में बताते हैं। इन्हें समझकर हम अपने कार्यों को सही समय पर करके बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं और अनचाही बाधाओं से बच सकते हैं।

तिथि: चंद्र कला का रहस्य

तिथि चंद्र मास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमें बताती है कि चंद्रमा पृथ्वी के सापेक्ष अपनी यात्रा में किस अवस्था में है। कुल 15 शुक्ल पक्ष की और 15 कृष्ण पक्ष की तिथियां होती हैं। प्रत्येक तिथि का अपना एक विशेष प्रभाव और स्वामी ग्रह होता है। उदाहरण के लिए:

  • प्रतिपदा: नए कार्य शुरू करने के लिए अच्छी।
  • द्वितीया: संबंध बनाने और नींव रखने के लिए शुभ।
  • चतुर्थी: शत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए अच्छी, लेकिन शुभ कार्यों से बचना चाहिए।
  • अष्टमी: वाद-विवाद और कानूनी मामलों के लिए उपयुक्त।
  • पूर्णिमा: धार्मिक कार्य, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ।
  • अमावस्या: पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए उत्तम, लेकिन नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।

किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने से पहले तिथि का विचार अवश्य करना चाहिए।

वार: दिन का स्वामी

प्रत्येक वार का अपना एक स्वामी ग्रह होता है, और उस ग्रह की ऊर्जा उस दिन प्रभावी रहती है।

  • रविवार (सूर्य): सरकारी कार्य, पदोन्नति, प्रशासनिक कार्य, यात्रा।
  • सोमवार (चंद्रमा): यात्रा, कृषि, कला, मन से संबंधित कार्य।
  • मंगलवार (मंगल): भूमि-भवन, ऋण चुकाना, कोर्ट-कचहरी, सर्जरी।
  • बुधवार (बुध): शिक्षा, लेखन, व्यापार, हिसाब-किताब।
  • गुरुवार (बृहस्पति): धार्मिक कार्य, ज्ञान प्राप्त करना, विवाह, शिक्षा।
  • शुक्रवार (शुक्र): कला, मनोरंजन, प्रेम संबंध, यात्रा, सौंदर्य।
  • शनिवार (शनि): सेवा कार्य, नींव रखना, दीर्घकालिक योजनाएं, लोहा व तेल संबंधी कार्य।

अपने कार्य की प्रकृति के अनुसार सही वार का चयन आपको सफलता की ओर ले जाता है।

नक्षत्र: तारों का प्रभाव

कुल 27 नक्षत्र होते हैं, और चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र में गोचर करता है। प्रत्येक नक्षत्र का अपना एक विशेष स्वभाव, देवता और प्रभाव होता है। नक्षत्रों का विचार विशेष रूप से विवाह, गृह प्रवेश और शिशु के नामकरण के समय किया जाता है।

  • अश्विनी: त्वरित कार्य, उपचार, नई शुरुआत।
  • भरणी: दृढ़ता, धैर्य, रचना।
  • कृतिका: अग्नि संबंधी कार्य, तेज और तीक्ष्ण कार्य।
  • पुष्य: शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश, खरीदारी।
  • शतभिषा: अनुसंधान, रहस्यमयी कार्य, चिकित्सा।

यदि आप किसी विशेष कार्य की शुरुआत कर रहे हैं, तो शुभ नक्षत्र का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है।

योग और करण: सूक्ष्म ऊर्जा का विश्लेषण

योग और करण पंचांग के वे अंग हैं जो हमें और भी सूक्ष्म स्तर पर दिन की ऊर्जा को समझने में मदद करते हैं। कुल 27 योग होते हैं, और प्रत्येक योग का अपना एक प्रभाव होता है। कुछ योग शुभ होते हैं, तो कुछ अशुभ। इसी तरह, करण भी तिथि के आधे भाग होते हैं और इनकी भी अपनी विशेषताएं होती हैं।

  • शुभ योग: जैसे सिद्ध योग, शुभ योग, अमृत योग, जो शुभ कार्यों के लिए उत्तम होते हैं।
  • अशुभ योग: जैसे व्यतिपात योग, गंड योग, शूल योग, जो महत्वपूर्ण कार्यों को टालने का संकेत देते हैं।

इनका ज्ञान आपको किसी भी कार्य में आने वाली संभावित बाधाओं से बचाता है।

शुभ-अशुभ समय: सही समय का चुनाव

पंचांग हमें बताता है कि दिन में कौन सा समय शुभ (अच्छा) है और कौन सा समय अशुभ (बुरा)। इन समयों को ध्यान में रखकर आप अपने दिन की योजना बना सकते हैं।

राहुकाल: जब रुक जाना चाहिए

राहुकाल प्रत्येक दिन आता है और इसे एक अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान कोई भी नया या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि राहुकाल में शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आती हैं या वे सफल नहीं होते।

क्या न करें:

  • नए व्यवसाय की शुरुआत।
  • महत्वपूर्ण यात्रा।
  • विवाह संबंधी वार्ता।
  • धन संबंधी बड़े लेनदेन।
  • नई खरीदारी।

क्या करें:

  • जो कार्य पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रख सकते हैं।
  • पूजा-पाठ या आध्यात्मिक कार्य कर सकते हैं।
  • घर के सामान्य कामकाज निपटा सकते हैं।

प्रत्येक दिन राहुकाल का समय अलग-अलग होता है, इसलिए आज का राहुकाल अवश्य देखें।

गुलिक काल और यमगण्ड काल

गुलिक काल भी राहुकाल की तरह ही एक अशुभ समय है, हालांकि इसका प्रभाव राहुकाल से थोड़ा कम माना जाता है। इस दौरान भी नए और शुभ कार्य टालने चाहिए। यमगण्ड काल मृत्यु के देवता यम से संबंधित है और इसे भी अशुभ माना जाता है। इस दौरान विशेष रूप से यात्रा और शुभ कार्यों से बचना चाहिए। इन तीनों कालों में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है।

अभिजीत मुहूर्त: दिन का सबसे शुभ समय

राहुकाल के विपरीत, अभिजीत मुहूर्त दिन का सबसे शुभ और शक्तिशाली समय माना जाता है। यह लगभग 48 मिनट की अवधि का होता है और लगभग हर दिन दोपहर के आसपास आता है (यह सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है)।

क्या करें:

  • कोई भी नया और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ समय है।
  • इंटरव्यू, मीटिंग्स और महत्वपूर्ण बातचीत।
  • किसी भी शुभ कार्य की नींव रखना।
  • नया व्यवसाय शुरू करना।
  • पूजा-पाठ, विशेष अनुष्ठान।

ऐसा माना जाता है कि अभिजीत मुहूर्त में किए गए कार्य सफलतापूर्वक पूरे होते हैं और उनमें कोई बाधा नहीं आती। यह भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त समय है।

चौघड़िया: यात्रा और व्यापार के लिए

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ हिस्सों में बांटकर शुभ-अशुभ समय बताती है। यह विशेष रूप से यात्रा और व्यापार संबंधी कार्यों के लिए बहुत उपयोगी है। इसमें शुभ, अमृत, चर (सामान्य), लाभ, काल, रोग और उद्वेग जैसी चौघड़ियां होती हैं। यात्रा या व्यापार शुरू करने से पहले शुभ या अमृत चौघड़िया का चुनाव करना चाहिए।

दिशाशूल: यात्रा की दिशा का महत्व

दिशाशूल एक और महत्वपूर्ण अवधारणा है जो हमें यात्रा करते समय ध्यान रखनी चाहिए। इसका अर्थ है कि किसी विशेष दिन पर किसी विशेष दिशा में यात्रा करना अशुभ माना जाता है, क्योंकि उस दिशा में एक नकारात्मक ऊर्जा प्रभावी होती है, जो यात्रा में बाधाएं उत्पन्न कर सकती है या अवांछित परिणाम दे सकती है।

दिशाशूल का निर्धारण वार (दिन) के अनुसार होता है:

  • सोमवार और शनिवार: पूर्व दिशा में दिशाशूल।
  • मंगलवार और बुधवार: उत्तर दिशा में दिशाशूल।
  • गुरुवार: दक्षिण दिशा में दिशाशूल।
  • शुक्रवार और रविवार: पश्चिम दिशा में दिशाशूल।

दिशाशूल के प्रभाव और उपाय

यदि किसी दिन आप दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करते हैं, तो आपको थकान, धन हानि, दुर्घटना या कार्य में बाधा का अनुभव हो सकता है। लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है, ज्योतिष में इसके लिए भी उपाय बताए गए हैं:

  1. सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा: यात्रा पर निकलने से पहले थोड़ा दही या दूध पीकर निकलें। थोड़ा सा दर्पण में अपना चेहरा देखकर भी जा सकते हैं।
  2. मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा: यात्रा पर निकलने से पहले गुड़ खाकर निकलें।
  3. गुरुवार को दक्षिण दिशा: यात्रा पर निकलने से पहले दही या जीरा खाकर निकलें।
  4. शुक्रवार और रविवार को पश्चिम दिशा: यात्रा पर निकलने से पहले थोड़ा दलिया या घी खाकर निकलें।

इसके अतिरिक्त, जिस दिशा में दिशाशूल हो, उस दिशा में कुछ कदम विपरीत दिशा में चलकर फिर अपनी वास्तविक दिशा में यात्रा शुरू करना भी एक प्रभावी उपाय माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को कम करता है।

आज के पंचांग के अनुसार क्या करें और क्या न करें

अब जब हमने पंचांग के विभिन्न पहलुओं को समझ लिया है, तो आइए एक साथ मिलकर देखें कि हमें अपने दैनिक जीवन में इन जानकारियों का उपयोग कैसे करना चाहिए। यह सामान्य दिशानिर्देश हैं, जो आपको एक सकारात्मक और उत्पादक दिन बिताने में मदद करेंगे।

क्या करें (शुभ कार्य):

  • शुभ मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त में शुरुआत: किसी भी नए और महत्वपूर्ण कार्य जैसे इंटरव्यू, मीटिंग, व्यापारिक समझौता, नया निवेश, गृह प्रवेश या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत अभिजीत मुहूर्त या किसी अन्य शुभ मुहूर्त में करें।
  • राहुकाल से बचें: यदि आप किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकल रहे हैं, तो राहुकाल के समय को टालें। यदि टालना संभव न हो तो यात्रा पर निकलने से पहले थोड़ा मीठा दही खाकर निकलें।
  • सही वार का चयन: जिस प्रकार का आपका कार्य है, उसके स्वामी वार में उसे करने का प्रयास करें। उदाहरण के लिए, शिक्षा संबंधी कार्य बुधवार को, भूमि संबंधी कार्य मंगलवार को।
  • दिशाशूल का ध्यान रखें: यदि दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करना अनिवार्य हो, तो ऊपर बताए गए उपायों का पालन करें। थोड़ी देर के लिए विपरीत दिशा में चलकर फिर अपनी दिशा में चलें।
  • पूजा-पाठ और ध्यान: शुभ योगों और नक्षत्रों में पूजा-पाठ, ध्यान और आध्यात्मिक साधना करने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • दान-पुण्य: अपनी क्षमतानुसार दान-पुण्य करें, विशेषकर अमावस्या और पूर्णिमा के दिन। यह कर्मों को शुद्ध करता है।
  • साधारण कार्य: घर के सामान्य काम, साफ-सफाई, बागवानी आदि आप किसी भी समय कर सकते हैं। इन पर अशुभ समय का प्रभाव कम होता है।
  • स्वास्थ्य पर ध्यान: योग, व्यायाम और स्वस्थ भोजन का अभ्यास करें। यह सभी शुभ समयों में अच्छा है।

क्या न करें (अशुभ कार्यों से बचें):

  • राहुकाल में महत्वपूर्ण निर्णय: राहुकाल में किसी भी प्रकार का बड़ा निर्णय लेने, नए व्यापार की शुरुआत करने या महत्वपूर्ण यात्रा पर निकलने से बचना चाहिए
  • अशुभ योगों में शुभ कार्य: व्यतिपात, गंड, शूल जैसे अशुभ योगों में विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यों को करने से बचें।
  • दिशाशूल में लंबी यात्रा: यदि संभव हो तो दिशाशूल वाली दिशा में लंबी यात्रा करने से बचें। यदि आवश्यक हो तो उपाय अवश्य करें
  • अमावस्या पर नया व्यवसाय: अमावस्या के दिन नए व्यवसाय या महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह पितरों का दिन होता है और इस दिन की ऊर्जा नए भौतिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं होती।
  • नकारात्मक विचार: किसी भी समय, विशेषकर अशुभ समय में, नकारात्मक विचारों से दूर रहें। अपनी वाणी और कर्म पर नियंत्रण रखें।
  • क्रोध और कलह: किसी भी दिन, लेकिन विशेषकर मंगलवार और शनिवार को, क्रोध और कलह से बचना चाहिए, क्योंकि इन दिनों नकारात्मक ऊर्जाएं अधिक प्रभावी हो सकती हैं।

व्यक्तिगत पंचांग और आपकी कुंडली

यह सभी पंचांग संबंधी जानकारी सामान्य होती है। यदि आप अपने जीवन के लिए अधिक सटीक और व्यक्तिगत मार्गदर्शन चाहते हैं, तो अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति, आपके लग्न और चंद्र राशि के अनुसार, शुभ-अशुभ समय और दिशाशूल का प्रभाव व्यक्तिगत रूप से बदल सकता है। एक अनुभवी ज्योतिषी आपकी कुंडली और आज के पंचांग का मिलान करके आपको सबसे उपयुक्त सलाह दे सकता है।

याद रखिए, ज्योतिष हमें अंधविश्वास नहीं सिखाता, बल्कि यह हमें प्रकृति और ब्रह्मांड की ऊर्जाओं को समझकर उनके साथ तालमेल बिठाकर चलने का मार्ग दिखाता है। यह हमें सही समय पर सही कार्य करने की प्रेरणा देता है, ताकि हमारा जीवन अधिक सहज और सफल बन सके।

मैं आशा करता हूँ कि आज की यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। हर सुबह आज का पंचांग देखकर अपने दिन की शुरुआत करें और सकारात्मक ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ें। यदि आपके कोई प्रश्न हैं या आप अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहते हैं, तो बेझिझक मुझसे संपर्क करें।

आपका ज्योतिषी मित्र,
अभिषेक सोनी

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